Apr 11, 2026
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भूमिगत ऊर्जा का निकास: भू-वैज्ञानिकों ने समझाया रुद्रप्रयाग में आए हालिया 3.06 तीव्रता के भूकंप का तंत्र

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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भूगर्भीय हलचल का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार सुबह रुद्रप्रयाग जिले में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब धरती अचानक हिलने लगी। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घबराकर अपने घरों और दुकानों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.06 मापी गई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार सुबह जब लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक जमीन के नीचे से तेज गड़गड़ाहट और कंपन महसूस हुआ। यह झटका करीब 10 से 15 सेकंड तक महसूस किया गया। ऊँची इमारतों और पुराने घरों में रह रहे लोगों में अधिक दहशत देखी गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि प्रशासन की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल या संपत्ति के बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। आपदा प्रबंधन तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के भीतर मुख्य रूप से 7 टेक्टोनिक प्लेट्स होती हैं, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, तो उस क्षेत्र को 'फॉल्ट लाइन' कहा जाता है। बार-बार के टकराव से प्लेटों के कोने मुड़ने लगते हैं और जब दबाव सहन शक्ति से बाहर हो जाता है, तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। इसी प्रक्रिया में जो ऊर्जा बाहर निकलने की कोशिश करती है, वह धरातल पर भूकंप (डिस्टर्बेंस) के रूप में दिखाई देती है। भूकंप का 'एपीसेंटर' (केंद्र) वह बिंदु होता है, जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से ऊर्जा निकलती है। एपीसेंटर पर कंपन सबसे तीव्र होता है और जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, इसका प्रभाव कम होता जाता है। रुद्रप्रयाग का यह झटका कम तीव्रता का होने के कारण बड़ी तबाही से बच गया, लेकिन बार-बार आती यह थर्राहट पहाड़ों में भविष्य के बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है। जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और भूकंप के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।