Apr 11, 2026
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रिकॉर्ड भीड़ का प्रबंधन: केदारनाथ धाम में प्रवाह बनाए रखने और अत्यधिक भीड़ से बचने में आरएफआईडी टैग कैसे करेंगे मदद

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देहरादून। उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। अमरनाथ यात्रा की तरह चारधाम यात्रियों को भी आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग दिए जाएंगे। इससे प्रशासन को हर समय यह पता रहेगा कि कितने यात्री कहां पहुंचे हैं और उनकी स्थिति क्या है।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने चारधाम यात्रा को लेकर आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और सचिव विनोद कुमार सुमन को यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। एनडीएमए का मानना है कि आरएफआईडी टैग से यात्रियों की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे किसी भी आपदा या इमरजेंसी स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकेंगे।

वर्तमान में चारधाम यात्रा में पंजीकरण अनिवार्य है, जिसमें यात्री की व्यक्तिगत जानकारी, यात्रा तिथि और स्वास्थ्य विवरण दर्ज किया जाता है। परिवहन विभाग वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड और यात्रियों के लिए ट्रिप कार्ड जारी करता है। एनपीआर कैमरों से वाहनों की निगरानी भी की जाती है। अब इन व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए आरएफआईडी टैग की सिफारिश की गई है।आरएफआईडी टैग यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले दिए जाएंगे। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह लगे आरएफआईडी रीडर के जरिए विभागों को तुरंत जानकारी मिल सकेगी कि यात्री किस स्थान पर पहुंच चुके हैं। इससे भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपदा प्रबंधन में काफी आसानी होगी। एनडीएमए के मुख्य सलाहकार मेजर जनरल सुधीर बहल ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य करने, हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए एसओपी में नए बिंदु जोड़ने और सीसीटीवी फुटेज का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से विश्लेषण कर भीड़ का अंदाजा लगाने का भी सुझाव दिया गया है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि एनडीएमए के सभी सुझावों को संबंधित विभागों तक भेज दिया गया है और इन्हें शीघ्र लागू करने की दिशा में कार्यवाही की जाएगी। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा है, जिसमें हर साल लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। पिछले वर्षों में भीड़, मौसम और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण कई दुर्घटनाएं हुई हैं। इसलिए इस बार सुरक्षा और प्रबंधन को और अधिक आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था सफल रही तो चारधाम यात्रा को और अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में यह एक बड़ा कदम साबित होगा।