Apr 16, 2026
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चंद्रग्रहण के सूतक में तुलसी के पत्ते का महत्व, जानिए खाने-पीने की चीजों को कैसे बचाएं

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साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण आज मंगलवार को लगने जा रहा है। खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस घटना को लेकर तीर्थनगरी सहित देशभर के मंदिरों में विशेष एहतियात बरती जा रही है। ग्रहण का स्पर्श दोपहर में होने के कारण सूतक काल सुबह से ही प्रभावी हो गया है, जिसके चलते सुबह 6:27 बजे से ही मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए हैं।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर लगने वाला यह चंद्रग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में प्रभावी होगा। यह एक पूर्ण चंद्रग्रहण है, जिसमें चंद्रमा पूर्ण रूप से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा और आसमान में 'ब्लड मून' यानी लाल रंग का चंद्रमा दिखाई देगा। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:27 बजे होगा, जबकि इसका मोक्ष (समापन) शाम 6:57 बजे होगा।

शास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। आज सुबह 6:27 बजे सूतक लगने के साथ ही पूजा-पाठ, अनुष्ठान और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। मंदिरों के बाहर इस संबंध में सूचना पट्ट और पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। सूतक काल के दौरान मंदिरों में प्रतिमाओं का स्पर्श वर्जित रहता है, इसलिए कपाट बंद रखे गए हैं। शाम 6:57 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। गंगा जल से मूर्तियों और मंदिर परिसर के अभिषेक के बाद ही आरती की जाएगी और भक्तों के लिए दर्शन सुलभ होंगे। ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि सूतक काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और ग्रहण काल में निरंतर भगवान के नाम का जप करना फलदायी होता है। ग्रहण की समाप्ति के बाद दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है।