देवरियाताल, तुंगनाथ, चोपता और मद्महेश्वर आने वाले पर्यटकों का प्रमुख पड़ाव बना गांव, स्थानीय उत्पादों और पहाड़ी व्यंजनों को भी मिल रहा बढ़ावा,
रोहित डिमरी। प्रधान संपादक
रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग का सारी गांव पर्यटन को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में मिसाल बनकर उभर रहा है। पर्यटन गांव के रूप में पहचान बना चुके सारी में ग्रामीणों ने पर्यटन को अपनी आजीविका का साधन बनाते हुए 40 से अधिक होम स्टे संचालित किए हैं। इन होम स्टे के माध्यम से स्थानीय परिवारों को रोजगार और नियमित आय के अवसर मिल रहे हैं, वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले पर्यटकों को पहाड़ी संस्कृति, खान-पान और आतिथ्य का अनुभव भी मिल रहा है।
सारी गांव से वर्षभर बड़ी संख्या में पर्यटक देवरियाताल, तुंगनाथ, चोपता और मद्महेश्वर सहित आसपास के प्रमुख पर्यटन एवं ट्रेकिंग स्थलों की ओर जाते हैं। ऐसे में गांव पर्यटकों के लिए ठहराव और ट्रेकिंग गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। होम स्टे में ठहरने वाले पर्यटकों को आवास के साथ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न सेवाएं भी मिलती हैं, जिससे गांव में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
सारी गांव के होम स्टे की एक खासियत स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक पहाड़ी भोजन भी है। ग्रामीण अपने खेतों में उत्पादित सब्जियों, दालों और मिलेट आदि से तैयार पारंपरिक व्यंजन पर्यटकों को परोस रहे हैं। इससे पर्यटकों को स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है, वहीं स्थानीय कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से ग्रामीणों की आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित हो रहे हैं।
राज्य सरकार की ओर से सारी गांव को ट्रेकिंग अट्रैक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके तहत गांव में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही अधिक से अधिक ग्रामीणों को होम स्टे स्थापित करने के लिए अनुदान उपलब्ध कराकर स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि सारी गांव को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक विकसित करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। गांव में पार्किंग, सड़क, शौचालय और ट्रेकिंग रूट जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से गांव में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं व ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
सारी गांव में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का यह जुड़ाव यह भी दर्शाता है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और पर्यटन गतिविधियां विकसित की जाएं तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा कर पलायन को कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

