Aug 13, 2026

भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा की तैयारियां तेज, एक सितंबर से होगा यात्रा का शुभारंभ, मोक्षधाम बदरीनाथ के दर्शन करेंगी भगवती चामुण्डा,

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रिपोर्ट : लक्ष्मण सिंह नेगी 

ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। कालीमठ घाटी के शीर्ष पर स्थित चौरा सिद्धपीठ में विराजमान भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी एक सितंबर से भगवती चामुण्डा की तृतीय चरण की दिवारा यात्रा का विधिवत शुभारंभ होगा। यात्रा के दौरान देवी की डोली विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देगी। तृतीय चरण की यात्रा में भगवती चामुण्डा मोक्षधाम बदरीनाथ भी पहुंचेंगी, जहां भगवान बदरीनाथ के दर्शन एवं विधिवत पूजा-अर्चना के बाद यात्रा आगे के पड़ावों के लिए रवाना होगी। दिवारा यात्रा को लेकर कालीमठ घाटी सहित यात्रा से जुड़े क्षेत्रों के ग्रामीणों, हक-हकूकधारियों, मंदिर समिति और यात्रा से जुड़े लोगों में खासा उत्साह बना हुआ है।

भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा तीन चरणों में प्रस्तावित है। प्रथम और द्वितीय चरण की यात्रा के बाद अब तृतीय चरण की यात्रा को धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुरूप भव्य रूप से संपन्न कराने की तैयारियां की जा रही हैं। यात्रा के दौरान देवी की डोली विभिन्न गांवों और प्रमुख पड़ावों से होकर गुजरेगी, जहां ग्रामीण एवं श्रद्धालु पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवती चामुण्डा का स्वागत करेंगे। देवी की डोली के गांव में पहुंचने पर पूजा-अर्चना, भोग और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाएगी। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और धार्मिक जयघोष के बीच देवी की डोली का स्वागत किया जाएगा। इससे यात्रा मार्ग के गांवों में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।

तृतीय चरण की दिवारा यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव मोक्षधाम बदरीनाथ रहेगा। भगवती चामुण्डा की डोली के बदरीनाथ धाम पहुंचने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। बदरीनाथ धाम में भगवान बदरीनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद देवी की डोली निर्धारित यात्रा कार्यक्रम के अनुसार आगे के पड़ावों के लिए प्रस्थान करेगी। दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी ने कहा कि देवी की दिवारा यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की प्राचीन लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

एक सितंबर से शुरू होने वाली यात्रा को लेकर संबंधित गांवों में व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का कार्य शुरू कर दिया गया है। यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं। देवी की डोली के स्वागत के लिए ग्रामीण मंदिर परिसरों और यात्रा पड़ावों को व्यवस्थित करने में जुटे हैं। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए उनके आवास, भोजन, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीण स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

कालीमठ घाटी की धार्मिक परंपराओं में दिवारा यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवारा यात्रा के दौरान क्षेत्र की आराध्य देवी अपने भक्तों के घर-आंगन और विभिन्न पड़ावों पर पहुंचकर उन्हें सुख-समृद्धि एवं खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसी आस्था के चलते दिवारा यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी ग्रामीण भी अपने पैतृक गांवों में पहुंचते हैं, जिससे गांवों में विशेष रौनक दिखाई देती है। देवी के स्वागत के लिए महिलाएं पारंपरिक परिधानों में शामिल होती हैं, जबकि पुरुष और युवा धार्मिक कार्यक्रमों एवं यात्रा की व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी ने कहा कि भगवती चामुण्डा की दिवारा यात्रा क्षेत्र की धार्मिक पहचान के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का कार्य करती है। देवी की डोली जिन-जिन गांवों और पड़ावों पर पहुंचेगी, वहां अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। तृतीय चरण की यात्रा में बदरीनाथ धाम के भ्रमण को लेकर इस बार विशेष उत्साह देखा जा रहा है। एक सितंबर से शुरू होने वाली यह दिवारा यात्रा धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत संगम बनेगी तथा यात्रा के दौरान कालीमठ घाटी सहित विभिन्न गांवों में भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।