नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा के लिए पटना में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार के सियासी सफर पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में बिहार को जंगल राज से मुक्त करने का काम किया। बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा, इनके दामन पर कोई दाग नहीं।
इधर नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने के फैसले के बाद पार्टी के अंदर हलचल बढ़ गई है। पटना में जेडीयू कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का घेराव भी किया। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अभी नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझा जाएगा और उनकी बात नीतीश कुमार तक पहुंचाई जाएगी। जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दो दशकों से अधिक समय तक जनता ने उन पर भरोसा किया और उसी भरोसे की ताकत से उन्होंने बिहार की सेवा की। उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद उनके पैतृक गांव कल्याण बिगहा में भी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जनता ने एनडीए को वोट भाजपा के नाम पर नहीं बल्कि नीतीश कुमार के चेहरे पर दिया था। ग्रामीणों ने कहा कि बिहार के लिए उनसे बेहतर नेता कोई नहीं हो सकता। इस बीच जेडीयू नेताओं ने दो दिन पहले संकेत दिया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में आ सकते हैं। चर्चा है कि नई सरकार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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