राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा शुरू, पहले दिन 28 लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

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115 बच्चों की आंखों की जांच, 14 को मिले निःशुल्क चश्मे,

रुद्रप्रयाग। जनपद में 41वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मंगलवार से शुरू हो गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्वावधान में आयोजित यह पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलेगा। पखवाड़े के प्रथम दिन विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें नेत्रदान के महत्व की जानकारी देते हुए लोगों को इसके लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान 28 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लेते हुए शपथ पत्र भरा।

 

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीमा टेकचंदानी के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रमों में बताया गया कि नेत्रदान एक महान सामाजिक एवं मानवीय कार्य है। मृत्यु के बाद दान की गई आंख के कॉर्निया का प्रत्यारोपण कर दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। वर्तमान में कॉर्निया की भारी कमी के कारण नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है।

डॉ. टेकचंदानी ने बताया कि पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें समुदाय के बीच पहुंचकर नेत्रदान के प्रति जागरूक करेंगी। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें, एएनएम और आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देंगी। विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के भीतर किया जाता है नेत्रदान

जखोली ब्लॉक के दूरस्थ राजकीय इंटर कॉलेज कैलाश बांगर और सीएचसी अगस्त्यमुनि में आयोजित जागरूकता गोष्ठियों में विशेषज्ञों ने बताया कि मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के भीतर आंखें प्राप्त की जानी आवश्यक होती हैं। नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए चिकित्सक स्वयं संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचते हैं और यह प्रक्रिया निःशुल्क होती है। किसी भी उम्र का व्यक्ति जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प ले सकता है, हालांकि कॉर्निया का स्वस्थ होना आवश्यक है। मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकता है।

यह भी बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति ने जीवनकाल में नेत्रदान की घोषणा नहीं की है, तो उसकी मृत्यु के बाद उसके परिजन भी नेत्रदान का निर्णय ले सकते हैं। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन लोगों को दृष्टि मिलने की संभावना रहती है।

पखवाड़े के तहत राइंका कैलाश बांगर में निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान के सहयोग से नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 115 बच्चों की आंखों की जांच की गई, जिनमें जरूरतमंद 14 बच्चों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए।

जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को नेत्र सुरक्षा के प्रति भी सचेत किया गया। चिकित्सकों ने वर्ष में कम से कम एक बार नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की जांच कराने, बच्चों को नुकीली वस्तुओं एवं खिलौनों से दूर रखने तथा आई फ्लू होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की। बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार की दवा आंखों में न डालने की सलाह दी गई। नेत्रदान से संबंधित जानकारी के लिए हेल्थ हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क करने की अपील की गई।

कार्यक्रमों में डॉ. नितीका, फार्मेसिस्ट राजेंद्र सिंह रावत, आरकेएसके काउंसलर जयदीप, निर्मल आश्रम संस्था के गौरव नौटियाल, कुलेंद्र रावत, शिवांशु, अमन सरियाल, सुखवीर सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।