‘जाते तो वो हैं जो आता है...’ भरत चौधरी ने विरोधियों पर साधा निशाना

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सौंराखाल में गरजे कैबिनेट मंत्री, बोले—महिलाओं को हथियार बनाकर राजनीति करने वालों को चेतावनी, 

कहा- ‘मैं विधायक रहूं या न रहूं, 25 साल तक कांग्रेस आने वाली नहीं’,

 

रोहित डिमरी । प्रधान संपादक 

रुद्रप्रयाग। जिला कार्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान एक महिला द्वारा कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित टिप्पणी और उनके पिता को अपशब्द कहे जाने के मामले के बाद बुधवार को सौंराखाल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री चौधरी का आक्रोश खुलकर सामने आया। उन्होंने विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन उनके पिता के लिए अपशब्द किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी अब महिलाओं को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मंत्री भरत सिंह चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर और जनता से जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा, “जाते तो वो हैं जो आता है, मैं तो कभी यहां से गया ही नहीं। उनसे पूछे उनके कार्यालय रुद्रप्रयाग में कहां है।” उनके इस बयान को विरोधियों पर सीधा राजनीतिक तंज माना जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि वह चुनाव जीते हों या हारे हों, उन्होंने कभी जनता से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने कहा कि उन्होंने लाखों रुपये के पोस्टर लगाकर अपनी राजनीति नहीं चमकाई, बल्कि लगातार जनता के बीच रहकर काम किया है। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन जनता के बीच रहा है और आगे भी रहेगा।

सौंराखाल में मंत्री भरत सिंह चौधरी के संबोधन के दौरान उनके तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने विरोधियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह जनता के बीच रहकर राजनीति करते हैं और किसी भी तरह के दबाव या राजनीतिक षड्यंत्र से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

कार्यक्रम में मंत्री के संबोधन के दौरान उनके समर्थकों में भी खासा उत्साह नजर आया। उनके तीखे राजनीतिक बयानों के बाद रुद्रप्रयाग की सियासत में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

 

 

‘मैं विधायक रहूं या न रहूं, 25 साल तक कांग्रेस नहीं आएगी’

सौंराखाल में मंत्री चौधरी ने विपक्षी कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मैं विधायक रहूं या ना रहूं, 25 साल तक कांग्रेस आने वाली नहीं है।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर राजनीतिक माहौल गरमा गया। मंत्री के इस तेवर को आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस पर खुली चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

 

‘फूल-माला का हक है तो जूते खाने का हक भी’

अपने संबोधन में मंत्री चौधरी ने जनता के प्रति जवाबदेही की बात करते हुए कहा कि यदि उन्हें जनता से फूल-मालाएं पहनने का अधिकार है तो गलत काम करने पर जनता द्वारा सवाल पूछने और विरोध करने का अधिकार भी है। उन्होंने कहा, “फूल माला पहनने का हक मुझे है तो जूते खाने का हक भी मुझे ही है। अगर मैं गलत करूं तो मुझे जरूर जूते मारे जाएं।” उनके इस बयान में जहां राजनीतिक तेवर दिखाई दिए, वहीं उन्होंने यह भी संदेश देने का प्रयास किया कि जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह रहना होगा।

 

 

पिता के खिलाफ टिप्पणी पर भावुक हुए मंत्री

धरना-प्रदर्शन के दौरान उनके पिता के लिए कथित तौर पर की गई अमर्यादित टिप्पणी का जिक्र करते हुए मंत्री भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद और विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर परिवार और माता-पिता को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने विरोधियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि राजनीतिक लड़ाई मुद्दों और नीतियों के आधार पर होनी चाहिए, व्यक्तिगत अपमान के जरिए नहीं।