नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इजरायल ने लेबनान पर बेहद तीव्र और योजनाबद्ध हवाई हमला करते हुए महज 10 मिनट के भीतर 160 बम गिराए, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मच गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में दो हफ्ते का सीजफायर घोषित हुए अभी सिर्फ एक दिन ही बीता था। इजरायली सेना ने स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर केवल ईरान तक सीमित है और इसमें लेबनान या उसकी राजधानी बेरूत शामिल नहीं हैं। इसी आधार पर इजरायल ने लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर लगातार हमले जारी रखे हैं। हमलों के दौरान इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान, बेरूत के आसपास के इलाकों और बेकाआ घाटी को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि करीब 100 अलग-अलग टारगेट्स पर सटीक हमले किए गए, जिनमें हथियार भंडार, रॉकेट लॉन्चर और कमांड सेंटर शामिल थे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सीजफायर सिर्फ ईरान के साथ लागू है। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि यह समझौता पूरे क्षेत्र में लागू होगा, जिससे अब उनकी कूटनीतिक भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लेबनान सरकार ने इन हमलों को बर्बर करार देते हुए कहा है कि इजरायल शांति की कोशिशों को कमजोर कर रहा है। दूसरी ओर हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका और गहरा गई है। इस पूरे घटनाक्रम में ईरान की स्थिति बेहद जटिल हो गई है। अगर वह लेबनान में हिज्बुल्लाह का समर्थन करता है, तो अमेरिका के साथ सीजफायर टूट सकता है। वहीं अगर वह चुप रहता है, तो उसका प्रमुख सहयोगी कमजोर पड़ सकता है। इस बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता अब और अधिक संवेदनशील हो गई है। लेबनान का मुद्दा इस बातचीत का सबसे बड़ा विवाद बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल के हमले जारी रहते हैं और हिज्बुल्लाह जवाबी कार्रवाई करता है, तो पूरा मिडिल ईस्ट फिर से बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है। इसका असर न केवल क्षेत्रीय शांति पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस तेजी से बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है, जहां एक छोटी चिंगारी भी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है।
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