Feb 27, 2026

शिक्षाविद श्यामादत्त शास्त्री के नाम से होगा इंटर कॉलेज मयकोटी का नाम

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रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के मयकोटी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज जवाहरनगर का नाम परिवर्तित कर अब स्वर्गीय श्यामा दत्त वशिष्ठ शास्त्री राजकीय इंटर कॉलेज, मयकोटी कर दिया गया है। यह निर्णय क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक होने के साथ-साथ भावनात्मक महत्व भी रखता है। विद्यालय के नामकरण को लेकर क्षेत्रवासियों एवं परिजनों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, पूर्व जिलाधिकारी सौरव गहरवार, पीटीए अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान मयकोटी देवेंद्र भट्ट तथा पूर्व ग्राम प्रधान अमित प्रदाली का हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त किया गया है। परिजनों का कहना है कि यह केवल विद्यालय का नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि क्षेत्र के एक महान समाज सुधारक और शिक्षाविद को सच्ची श्रद्धांजलि है।

 

इस अवसर पर डॉ. प्रियांक मोहन वशिष्ठ ने कहा कि यह उनके परिवार और पूरे मयकोटी क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव और भावुकता का क्षण है। उन्होंने कहा कि ताऊ जी स्व. शम्भू प्रसाद वशिष्ठ द्वारा लिया गया संकल्प आज पूर्ण हुआ है और इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी का हृदय से आभार है। डॉ. वशिष्ठ ने कहा कि स्व. श्यामा दत्त वशिष्ठ शास्त्री का जीवन समाज सुधार, शिक्षा और राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा और उनके नाम पर विद्यालय का नामकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। इस अवसर पर ग्राम प्रधान देवेंद्र भट्ट, चंद्र मोहन वशिष्ठ, कृष्णा नंद जी, पूर्व प्रधान अमित प्रदाली ने भी खुशी जाहिर है। 

 

कौन थे श्यामा दत्त शास्त्री 

 

श्यामा दत्त शास्त्री का जन्म फरवरी 1908 को रुद्रप्रयाग जिले स्थित मयकोटी गांव में क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषी स्व. वासवानंद के घर पर हुआ। अपनी पढ़ाई के शुरुआती दौर के बाद यह समाज सुधार के लिए निकल पड़े, श्यामा दत्त ने बनारस में शास्त्री की परीक्षा पास की तो इन्हें शास्त्री जी कहकर पुकारा जाने लगा। श्यामा दत्त शास्त्री ने युवा अवस्था में शिक्षा, नशे छुआछूत, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था और पूरे इलाके के युवाओं का ग्रुप तैयार कर युवाओं की एक कैबिनेट तैयार की जिसका नेतृत्व खुद शास्त्री करते रहे.

 

शास्त्री के अथक प्रयासों से मयकोटी में जूनियर हाई स्कूल खोलने की घोषणा हुई आजादी से पहले उस क्षेत्र में यह मात्र पहला स्कूल था पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम पर इस स्कूल को खोला गया था।