देहरादून: अग्निवीर योजना पर कांग्रेस का तीखा हमला: गोदियाल,प्रीतम और हरक ने उठाई योजना रद्द करने की मांग

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देहरादून। केंद्र सरकार की 'अग्निवीर भर्ती योजना' को लेकर उत्तराखंड में सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की इस नीति पर सीधा प्रहार करते हुए इसे तत्काल समाप्त करने और सेना में पहले की तरह स्थायी भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की जोरदार मांग की है।

अग्निवीर भर्ती योजना को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने 17 सितंबर को योजना पर आपत्ति जताते हुए इसे समाप्त करने और सेना में पहले की तरह स्थायी भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चार वर्ष की सेवा के बाद युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि उत्तराखंड का सेना से विशेष सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के बड़ी संख्या में परिवार सैन्य सेवाओं से जुड़े हैं, ऐसे में अग्निवीर व्यवस्था का असर यहां के युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष रूप से पड़ता है। उन्होंने चार वर्ष की सेवा के बाद युवाओं के सामने पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने केंद्र से अग्निवीर योजना को समाप्त कर पूर्व व्यवस्था के अनुरूप स्थायी भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की मांग की है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी अग्निवीर योजना को युवाओं के भविष्य और स्थायी रोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने योजना को लेकर युवाओं की रोजगार संबंधी चिंताओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है। अग्निपथ योजना को लेकर उत्तराखंड में चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब राज्य की राजनीति में युवाओं, रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। कांग्रेस ने इसे अपने राजनीतिक विमर्श में भी शामिल किया है। हालांकि, अग्निवीर व्यवस्था पर राजनीतिक दलों के मत अलग-अलग हैं और योजना को लेकर सरकार का पक्ष तथा इसके प्रावधानों को भी बहस के संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। उत्तराखंड में सेना भर्ती की मजबूत सामाजिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अग्निवीर योजना पर उठे सवालों का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि सैन्य सेवा से जुड़े परिवारों की अपेक्षाओं और युवाओं के करियर विकल्पों से भी जुड़ा है। कांग्रेस नेताओं की मांग के बाद अब यह मुद्दा राज्य में रोजगार और सैन्य भर्ती से जुड़े व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।