May 20, 2026

कोट मल्ला के मिश्रित वन में सजी ‘पर्यावरण पाठशाला’, बच्चों ने सीखे प्रकृति संरक्षण के गुर

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रुद्रप्रयाग। कोट मल्ला के सुंदर मिश्रित वन क्षेत्र में आयोजित “पर्यावरण पाठशाला” कार्यक्रम बच्चों के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित हुआ। कार्यक्रम में बीना इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता के महत्व की जानकारी दी गई। प्रकृति की गोद में आयोजित इस पाठशाला का उद्देश्य बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना था।

 

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जल स्रोतों, मिट्टी, वन्यजीवों और मानव जीवन का आधार हैं। मिश्रित वन वर्षा चक्र को संतुलित रखने, भूमि कटाव रोकने और प्राकृतिक जल स्रोतों को जीवित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

बच्चों को जैव विविधता के महत्व से भी अवगत कराया गया। विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों, औषधीय पौधों, पक्षियों और वन्य जीवों के आपसी संबंधों को सरल और रोचक तरीके से समझाया गया। विद्यार्थियों ने जंगल में मौजूद पेड़ों की पत्तियों, पक्षियों और प्राकृतिक दृश्यों के जीवंत स्केच बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।

 

इस अवसर पर पौधरोपण अभियान भी चलाया गया, जिसमें सभी छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों को संदेश दिया गया कि एक पौधा भविष्य की स्वच्छ हवा, जल और जीवन का आधार है। सभी विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने स्तर पर योगदान देने का संकल्प लिया।

 

कार्यक्रम में “बर्ड वॉचिंग” गतिविधि भी आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों को दूरबीन और प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से विभिन्न पक्षियों की पहचान, उनकी आवाज़ और जंगल में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इससे बच्चों में प्रकृति के प्रति जिज्ञासा और संवेदनशीलता बढ़ी।

 

कार्यक्रम में पर्यावरण विशेषज्ञ देव राघवेंद्र बद्री, प्रसिद्ध पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली, प्रधानाचार्य अनूप राणा, अध्यापक पियूष शर्मा सहित छात्र-छात्राएँ अनुराज, सारिका, पूजा, इशांत, विजयलक्ष्मी और साधना मौजूद रहे। आयोजन को नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल बताया गया।