रुद्रप्रयाग।रेल विकास निगम और मेघा कंपनी की ओर से कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे ब्लास्टिंग और मलबा डंपिंग के मामले में अधिवक्ता विवेक कठैत ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को शिकायती पत्र सौंपते हुए 72 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो वह इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में ले जाएंगे।

अधिवक्ता विवेक कठैत ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि रेल विकास निगम और मेघा कंपनी द्वारा रात के समय नियमों का उल्लंघन करते हुए ब्लास्टिंग की जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से ब्लास्टिंग की अनुमति रात 9 बजे तक ही दी गई है, लेकिन इसके बावजूद कंपनियां रात 11 बजे से लेकर सुबह 3 बजे के बीच विस्फोट कर रही हैं। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की नींद, सुरक्षा और शांति प्रभावित हो रही है।

कठैत ने प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि के भीतर सूर्यास्त (शाम 6 बजे) के बाद ब्लास्टिंग की अनुमति निरस्त नहीं की जाती और नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाता, तो वे इस मामले को न्यायालय और एनजीटी में चुनौती देंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अधिवक्ता ने कहा कि क्षेत्र में हो रही अवैध डंपिंग से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे को कथित रूप से अलकनंदा और अन्य स्थानीय नदियों में फेंका जा रहा है, जिससे जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही इससे आसपास के गांवों में जंगली जानवरों का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कठैत ने कहा कि प्रशासन की चुप्पी यह दर्शाती है कि आम जनता के अधिकारों से ऊपर कंपनियों के मुनाफे को रखा जा रहा है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
रात्रि ब्लास्टिंग से बढ़ा वन्यजीवों का खतरा
अधिवक्ता के अनुसार रात में हो रहे विस्फोटों के कारण कई बार ग्रामीणों को सुरक्षा के लिए घरों से बाहर निकलना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र में बाघ और भालू जैसे जंगली जानवरों के हमले का खतरा भी बढ़ जाता है।
अवैध डंपिंग से जल स्रोत प्रदूषित
शिकायत में यह भी कहा गया है कि निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे को नदियों में फेंका जा रहा है, जो जल प्रदूषण निवारण अधिनियम 1974 का उल्लंघन है और इससे जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है।
धूल से बढ़ रही सांस की बीमारियां
क्षेत्र में धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण बुजुर्गों और बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या से परेशान हैं।