गोबर-गोमूत्र से दीये, धूप और उपले बनाने की यूनिट लगाकर सैकड़ों लोगों को रोजगार से जोड़ने की पहल,
पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य रोहित डिमरी ने सौंपा जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को पत्र,,
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ हाईवे समेत जिले के प्रमुख मार्गों पर निराश्रित गोवंश की बढ़ती संख्या अब सिर्फ पशु संरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तिलवाड़ा क्षेत्र में सड़क किनारे घूम रहे गोवंश को तेज रफ्तार वाहनों से कुचलने की घटनाओं को रोकने और उनके संरक्षण के लिए उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं गौ रक्षा विभाग रुद्रप्रयाग के अध्यक्ष रोहित डिमरी ने जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर ठोस कदम उठाने की मांग की।
डिमरी ने नगर पंचायत तिलवाड़ा में 50 से अधिक निराश्रित गोवंश के लिए गौशाला निर्माण के साथ ही पूरे जिले में करीब एक हजार क्षमता की निराश्रित गोवंशशाला स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ाव तिलवाड़ा में बड़ी संख्या में गोवंश सड़कों पर भटक रहा है। रात के समय अज्ञात वाहनों की चपेट में आने से गोवंश की मौत की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना रहता है।
उन्होंने बताया कि नगर पंचायत तिलवाड़ा ने केदारनाथ हाईवे स्थित कूड़ा डंपिंग जोन के समीप करीब 15 गोवंश की क्षमता वाली गौशाला बनाई है, लेकिन क्षेत्र में मौजूद गोवंश की संख्या के लिहाज से यह व्यवस्था बेहद सीमित है। डिमरी ने तिलवाड़ा पुलिस चौकी के पास पार्किंग के नीचे करीब तीन नाली सरकारी भूमि पर टिनशेड निर्माण का सुझाव दिया, ताकि वहां गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिया जा सके।
डिमरी ने गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र तक सीमित रखने के बजाय इन्हें स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की भी मांग की। उन्होंने पपडासू में गोबर से दीये, धूप, उपले और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने की यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। धार्मिक स्थलों और यात्रा मार्गों, विशेषकर बद्री, केदार, धारी देवी मंदिर, कालीमठ, विश्वनाथ, त्रियुगीनारायण सहित अन्य क्षेत्रों में इन उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय बाजार विकसित करने की बात कही।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में रूद्रप्रयाग में सरकार की मदद से चार निराश्रित गौवंशशालाओं का संचालन हो रहा है, जिनमें करीब 200 गोवंश रखे गए हैं। सामाजिक संगठनों और साधु-संत समाज से जुड़े लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। डिमरी ने कहा कि गोबर और गोमूत्र का व्यवस्थित उपयोग गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर सैकड़ों लोगों को रोजगार से जोड़ सकता है।
ज्ञापन में जिलाधिकारी से संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर निराश्रित गोवंश संरक्षण, सड़क सुरक्षा और गोबर आधारित रोजगार सृजन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कराने का अनुरोध किया गया है।

