Jun 18, 2026

एम्बुलेंसों की बदहाली और कर्मचारियों के शोषण पर बरसे युवा नेता मोहित डिमरी, सरकार को घेरा

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जो गाड़ियां खुद 'वेंटिलेटर' पर हैं, वे मरीजों की जान क्या बचाएंगी

 

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी और प्रखर युवा नेता मोहित डिमरी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रुद्रप्रयाग जनपद में जीवनदायिनी '108' आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा की खस्ताहाल स्थिति और उसमें काम करने वाले कर्मचारियों के हो रहे मानसिक व आर्थिक शोषण पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जो गाड़ियां खुद 'वेंटिलेटर' पर हैं, वे मरीजों की जान क्या बचाएंगी?

 

युवा नेता मोहित डिमरी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा "पहाड़ की संकरी और खतरनाक सड़कों पर, जहां रात के अंधेरे, भारी बारिश और आंधी-तूफान के बीच मरीजों को अस्पताल पहुंचाना होता है, वहां सरकार ने इन खटारा गाड़ियों को मरने के लिए छोड़ दिया है। इन एम्बुलेंसों की स्थिति इतनी डरावनी है कि मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दे।

 

उन्होंने बताया कि गाड़ियों के पिछले और अगले हिस्से पूरी तरह टूटकर जंग खा चुके हैं। क्या इसी 'हाईटेक' स्वास्थ्य सेवा का दावा सरकार करती है?

 

मोहित डिमरी ने एम्बुलेंस सेवा में तैनात ड्राइवरों और फार्मासिस्टों की दयनीय स्थिति पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे जांबाज कर्मचारी देर रात आंधी-तूफान और भूस्खलन के मलबे के बीच भी संकरी सड़कों पर चलते हैं ताकि किसी की जान बचाई जा सके।f इतनी कठिन परिस्थितियों में काम करने के बाद भी इन्हें मिलने वाला मानदेय 'ऊंट के मुंह में जीरे' के समान है। आज के दौर में इस मामूली मानदेय से इन कर्मचारियों के लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों को पढ़ाना भी नामुमकिन हो गया है।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस संचालन करने वाली कंपनियों और विभाग द्वारा इन युवाओं का बेरहमी से शोषण किया जा रहा है।

 

पूर्व प्रत्याशी मोहित डिमरी ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश सरकार को चेताया है कि वे तुरंत रुद्रप्रयाग सहित पूरे पहाड़ में एम्बुलेंसों की स्थिति को दुरुस्त करें और ड्राइवरों व फार्मासिस्टों को सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित कराएं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही इन जीवनदायिनी सेवाओं को नया जीवन नहीं मिला, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ और कर्मचारियों का शोषण बंद नहीं हुआ, तो वह आंदोलन के लिए मज़बूर हो जायेंगे।