May 04, 2026

भारी बर्फबारी में केदारनाथ पहुंचे त्रिभुवन चौहान का तीखा हमला — “व्यवस्था फेल, स्थानीयों के हक़ कुचले जा रहे हैं।

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में जारी अव्यवस्थाओं को लेकर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के उपाध्यक्ष त्रिभुवन चौहान ने तीखे तेवर दिखाते हुए सीधे प्रशासन और बीकेटीसी पर सवालों की बौछार कर दी है। भारी बर्फबारी के बीच धाम पहुंचे चौहान ने जमीनी हकीकत देखी और साफ कहा—“इतनी भारी फोर्स तैनाती के बावजूद व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं, यह सीधा-सीधा कुप्रबंधन है।”

उन्होंने बताया कि मौके पर करीब 70 पुलिस कर्मी, 25 ITBP जवान, 5 सैन्य कर्मी, 70–80 बीकेटीसी कर्मचारी और अन्य विभागों के 70–80 लोग मौजूद हैं, फिर भी हालात बेकाबू हैं। “इतनी बड़ी फौज होने के बावजूद अगर लाइनें तक नहीं संभल रहीं, तो जिम्मेदार कौन है?”—चौहान ने सवाल उठाया।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद त्रिभुवन चौहान को मौके पर खड़े होकर तीन बार श्रद्धालुओं को लाइन में लगाना पड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“अगर एक जनप्रतिनिधि यह कर सकता है, तो पूरी मशीनरी क्यों फेल है?”

होटल क्षेत्र की बदहाली पर भी उन्होंने जमकर हमला बोला। खुले पाइप, कीचड़ छुपाने के लिए बिछाई गई टिन और सीवर व्यवस्था का अभाव—इन सबको उन्होंने “यात्रियों के लिए खतरे का जाल” बताया। “यह आस्था का केंद्र है या अव्यवस्था का अड्डा?”—उन्होंने तीखा सवाल उठाया।

मुख्य दर्शन लाइन को लेकर भी उन्होंने प्रशासन की योजना को “हास्यास्पद” बताया। आठ फुट ऊंची रेलिंग में बिना इमरजेंसी निकास के श्रद्धालुओं को खड़ा करना, उनके मुताबिक “सीधे-सीधे हादसे को न्योता देना है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो यह मुद्दा बड़ा जनांदोलन बनेगा।

बीकेटीसी कर्मचारियों को लेकर भी चौहान ने सरकार को घेरा। “600 करोड़ की घोषणाएं हुईं, कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन वृद्धि के वादे किए गए, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। क्या सरकार 2027 चुनाव का इंतजार कर रही है?”—उन्होंने सीधा हमला बोला।

उन्होंने साफ कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होगी। “तीर्थ पुरोहित, घोड़ा-खच्चर संचालक, दुकानदार, टेंट व्यवसायी—सबकी रोजी-रोटी दांव पर है, और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।”

अंत में चौहान ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा—“अगर जनता ने 2027 में मौका दिया, तो सबसे पहले स्थानीयों के हक़ सुरक्षित किए जाएंगे। अभी भी समय है—व्यवस्था सुधर जाए, वरना आंदोलन तय है।”