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मौसम ने बदली करवट, केदारनाथ सहित हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी; बढ़ी ठिठुरन,

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तापमान में गिरावट से जनजीवन प्रभावित, ऊंचाई वाले क्षेत्रों से पशुधन समेत गांवों की ओर लौटने लगे भेड़पालक,

ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। केदारघाटी में मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। केदारनाथ धाम सहित आसपास की ऊंची पर्वतीय चोटियों पर बर्फबारी होने से तापमान में गिरावट आई है, जिससे पूरी केदारघाटी में ठंड का असर बढ़ने लगा है। सुबह और शाम के समय सर्दी का प्रकोप अधिक महसूस किया जा रहा है। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड और प्रतिकूल मौसम को देखते हुए भेड़पालकों ने अपने भेड़-बकरियों के साथ निचले इलाकों में स्थित गांवों की ओर लौटना शुरू कर दिया है।

 

बीते दिनों तक केदारघाटी के निचले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब आसमान में बादलों की आवाजाही, हल्की बूंदाबांदी और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते ठंड बढ़ गई है। ऊंची पर्वतीय चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढकने लगी हैं। मौसम में आए बदलाव का असर तापमान के साथ ही स्थानीय लोगों की दिनचर्या पर भी दिखाई देने लगा है। लोगों ने ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है।

 

हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और तापमान में गिरावट का सबसे अधिक असर उन भेड़पालकों की दिनचर्या पर पड़ रहा है, जो गर्मियों के दौरान अपने पशुधन के साथ ऊंचाई वाले बुग्यालों और जंगलों में प्रवास करते हैं। गर्मियों में पशुओं को ऊंचाई वाले चरागाहों में ले जाने वाले भेड़पालक अब मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए निचले इलाकों की ओर लौटने लगे हैं।

 

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार गिरते तापमान, बर्फबारी और पशुओं के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भेड़पालकों की यह मौसमी वापसी पर्वतीय जीवन की पारंपरिक व्यवस्था का हिस्सा है। सर्दियों की शुरुआत से पहले भेड़-बकरियों को सुरक्षित स्थानों पर लाना उनकी प्राथमिकता रहती है। इससे पशुधन को कड़ाके की ठंड और खराब मौसम से बचाने में मदद मिलती है।

 

मौसम में आए बदलाव ने संकेत दे दिया है कि केदारघाटी और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में शीत ऋतु की आहट तेज होने लगी है। हिमालयी चोटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में ठंड बढ़ने से क्षेत्र का मौसम पूरी तरह बदलने लगा है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सर्दी का असर और बढ़ सकता है। ऐसे में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, भेड़पालकों और पशुधन की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतना जरूरी होगा।