Aug 06, 2026

लोक संस्कृति के संरक्षण को मिला सम्मान डॉ. नंदा सती होंगी तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित,

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श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की लोक परंपराओं और मांगल गीतों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाली चमोली की बेटी एवं हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. नंदा सती को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 13 महिलाओं का चयन किया है, जिनमें डॉ. नंदा सती भी शामिल हैं। उन्हें 8 अगस्त को आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सम्मानित करेंगे।

 

डॉ. नंदा सती लंबे समय से उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति, विशेषकर मांगल गीतों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने शोध कार्यों, सांस्कृतिक आयोजनों, संगीत प्रस्तुतियों और शिक्षण के माध्यम से प्रदेश की लोक विरासत को नई पहचान दिलाने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से अनेक युवा लोकसंगीत की ओर आकर्षित हुए हैं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए हैं।

 

संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोकगीतों और लोकधुनों के संरक्षण के लिए कार्य किया है। उनके शोध और सांस्कृतिक प्रयास उत्तराखंड की विलुप्त होती लोक परंपराओं को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

 

डॉ. नंदा सती के चयन पर चमोली जनपद, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। इसे उत्तराखंड की लोक-सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए समर्पित कार्यों का सम्मान बताते हुए लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

 

गौरतलब है कि तीलू रौतेली पुरस्कार उत्तराखंड सरकार का एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को प्रदान किया जाता है। डॉ. नंदा सती का सम्मान प्रदेश की लोक संस्कृति और मांगल गीतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को नई पहचान देगा।