Aug 19, 2026

बद्री-केदार की आस्था को रोजगार का आधार बना रहीं पहाड़ की बेटियां,

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मंदिरों के आकर्षक स्मृति चिह्न तैयार कर आत्मनिर्भर बन रहीं अगस्त्यमुनि की महिलाएं, समूह ने एक साल में कमाया 3.95 लाख का मुनाफा,

 

रुद्रप्रयाग। पहाड़ की संस्कृति, धार्मिक आस्था और स्थानीय विरासत अब महिलाओं के लिए स्वरोजगार का मजबूत आधार बन रही है। अगस्त्यमुनि विकासखंड में ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना से जुड़ी महिलाएं बद्री-केदार क्षेत्र की धार्मिक पहचान को आकर्षक स्मृति चिह्नों का रूप देकर अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं।

 

अगस्त्यमुनि स्थित ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बद्रीनाथ, केदारनाथ, धारी देवी, कार्तिक स्वामी और कालीमठ सहित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के मंदिरों के आकर्षक मॉडल तैयार कर रही हैं। पहाड़ी वास्तुकला की झलक लिए इन स्मृति चिह्नों को श्रद्धालुओं और पर्यटकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। उत्पादों की बिक्री से समूह की महिलाओं को आय का बेहतर साधन मिल रहा है।

समूह से जुड़ी युवती दिव्या बताती हैं कि पढ़ाई के साथ वह स्वयं सहायता समूह की गतिविधियों से जुड़ी हैं। वह धूपबत्ती, अगरबत्ती के साथ विभिन्न मंदिरों के स्मृति चिह्न तैयार करती हैं। उनके अनुसार समूह से जुड़ने के बाद उन्हें घर के आसपास ही रोजगार का अवसर मिला है। साथ ही समूह की अन्य महिलाओं को भी आय अर्जित करने का जरिया मिला है।

 

खंड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि सुरेश शाह ने बताया कि ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के तहत महिलाओं को उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण देने के साथ आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह से वर्तमान में छह से सात महिलाएं जुड़ी हैं। समूह द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री सरस केंद्रों, स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है।

 

समूह के प्रदर्शन के आंकड़े भी महिलाओं की मेहनत की कहानी बयां कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में समूह ने 2.54 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह लाभ बढ़कर 3.95 लाख रुपये पहुंच गया। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब सात लाख रुपये की बिक्री हो चुकी है, जिसमें समूह को 2.75 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हुआ है।

 

स्थानीय संसाधनों और पहाड़ी संस्कृति को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादों में ढालकर ये महिलाएं दोहरा लाभ हासिल कर रही हैं। एक ओर उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, तो दूसरी ओर बद्री-केदार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत स्मृति चिह्नों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंच रही है। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के जरिए महिलाओं को मिला यह अवसर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर पेश कर रहा है।