टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने के संकेत, क्षेत्रीय भावनाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक सरोकारों को बनाया आधार,
ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। कालीमठ घाटी की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पौराणिक परंपराओं को अपने भजनों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने वाली पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सोमेश्वरी भट्ट ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा से अपनी दावेदारी ठोक दी है। उनकी दावेदारी सामने आने के बाद कालीमठ घाटी से लेकर गुप्तकाशी क्षेत्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सोमेश्वरी भट्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि भाजपा संगठन ने उनकी दावेदारी को गंभीरता से नहीं लिया और उनकी अनदेखी की गई तो वह समर्थकों एवं क्षेत्र की जनता से विचार-विमर्श के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय सोमेश्वरी भट्ट की पहचान कालीमठ घाटी की लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ी रही है। देवी-देवताओं की महिमा से जुड़े भजनों के माध्यम से वह क्षेत्र की पौराणिक विरासत और लोक परंपराओं को जीवंत रखने का प्रयास करती रही हैं। पूर्व में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में जनप्रतिनिधित्व करने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं और सामाजिक सरोकारों से उनका जुड़ाव रहा है।
सोमेश्वरी भट्ट ने अपनी राजनीतिक दावेदारी का प्रमुख आधार कालीमठ घाटी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को बनाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र की धार्मिक विरासत केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां की सामाजिक पहचान, लोक संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का आधार है। सिद्धपीठ कालीमठ समेत आसपास के धार्मिक स्थलों में तीर्थाटन और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इनका लाभ स्थानीय लोगों को अपेक्षित रूप से नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने क्षेत्र की सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संचार, पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि उन्हें राजनीतिक मंच मिलता है तो धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा।
अपनी दावेदारी में उन्होंने पहाड़ की महिलाओं की आवाज को भी प्रमुखता दी है। उनका कहना है कि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाएं सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाया है। वह महिलाओं और ग्रामीण समाज की समस्याओं को विधानसभा तक मजबूती से पहुंचाने का दावा कर रही हैं।
विगत वर्ष हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य पद पर चुनाव लड़ चुकी सोमेश्वरी भट्ट का कहना है कि वह लंबे समय से क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझती रही हैं। इसी अनुभव और क्षेत्रीय जुड़ाव के आधार पर अब वह विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। उनका कहना है कि उनकी राजनीतिक सक्रियता किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से अधिक क्षेत्र की जनता की भावनाओं और समस्याओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से है।
भाजपा संगठन के समक्ष अपनी दावेदारी रखते हुए सोमेश्वरी भट्ट ने कहा कि टिकट वितरण में पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं, महिलाओं और क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े लोगों की भावनाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी नेतृत्व उनकी दावेदारी स्वीकार करता है तो वह संगठन के अनुशासन और पार्टी की नीतियों के अनुरूप पूरी निष्ठा से चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, टिकट नहीं मिलने की स्थिति में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखा है।
सोमेश्वरी भट्ट की इस दावेदारी ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कालीमठ घाटी और गुप्तकाशी क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें भाजपा संगठन के फैसले पर टिकी हैं। पार्टी प्रत्याशी चयन में किन राजनीतिक, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को प्राथमिकता देती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। यदि संगठन की ओर से उनकी दावेदारी को दरकिनार किया जाता है और वह निर्दलीय मैदान में उतरती हैं, तो इसका क्षेत्र की चुनावी राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह भी देखने वाली बात होगी। धार्मिक भजनों के जरिए कालीमठ की पौराणिक परंपराओं को स्वर देने से लेकर पंचायत प्रतिनिधि के रूप में जनसेवा तक का अनुभव रखने वाली सोमेश्वरी भट्ट की विधानसभा चुनाव को लेकर दावेदारी ने क्षेत्र की सियासत में निश्चित तौर पर एक नया राजनीतिक अध्याय जोड़ दिया है।

