उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने तत्परता और बेहतरीन कानून व्यवस्था का उदाहरण पेश करते हुए महज 72 घंटे के भीतर एक बेहद शातिर और पेशेवर अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कनखल क्षेत्र से चोरी की गई तीन साल की मासूम बच्ची राधिका को सकुशल बरामद कर लिया है। इसके साथ ही गिरोह की निशानदेही पर दिल्ली से चोरी किया गया एक और मासूम बच्चा भी बरामद हुआ है। पुलिस ने इस संगठित गिरोह के कुल छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो शादीशुदा जोड़े और दो महिलाएं शामिल हैं। इस गिरोह के तार उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़े हुए हैं। मायापुर स्थित एसपी सिटी कार्यालय में मामले का ब्यौरा देते हुए एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि बीती 6 मई को कनखल थाना क्षेत्र के बैरागी कैंप स्थित झुग्गी-झोपड़ी से एक तीन साल की मासूम बच्ची को बिस्किट का लालच देकर अगवा कर लिया गया था। पीड़ित परिवार की बेहद गरीब माली हालत को देखते हुए पुलिस समझ गई थी कि यह मामला फिरौती का नहीं, बल्कि बच्चा चोरी करने वाले किसी संगठित गिरोह का है।
एसएसपी ने तुरंत पुलिस टीमों का गठन कर हर घंटे की प्रगति रिपोर्ट मांगी। पुलिस ने ग्राउंड जीरो पर दिन-रात एक करते हुए सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जब दिल्ली से 4 मई को चोरी हुए एक बच्चे की फुटेज और हरिद्वार की फुटेज का मिलान किया गया, तो दोनों जगहों पर एक ही गिरोह के चेहरे सामने आए। इसके बाद पुलिस ने सोशल मीडिया और अन्य राज्यों की पुलिस की मदद से कड़ियां जोड़ना शुरू किया। हरिद्वार पुलिस द्वारा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में दी जा रही ताबड़तोड़ दबिशों से घबराकर गिरोह के सदस्य अपनी जान बचाने के लिए तीन साल की बच्ची राधिका को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गए। आरपीएफ की सूचना पर दिल्ली पहुंची हरिद्वार पुलिस ने बच्ची को सकुशल रिकवर किया। पकड़े गए आरोपियों से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने कबूला कि बीती 24 मई को उन्होंने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से भी एक डेढ़ साल के बच्चे 'कार्तिक' को चोरी किया था और उसका सौदा ₹1.5 लाख में तय कर उसे यूपी के बदायूं में बेच दिया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बदायूं से कार्तिक को भी सकुशल बरामद कर लिया। गिरोह इस तीन साल की बच्ची राधिका को भी राजस्थान के किसी ग्राहक को बेचने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। चुराए गए बच्चों की कीमत ₹2 लाख से लेकर ₹5 लाख तक लगाई जाती थी। गिरोह में काम का बंटवारा बिल्कुल साफ था; कोई बच्चा चुराता था, कोई उसे एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाता था, तो कोई फर्जी मां-बाप बनकर निसंतान दंपतियों के रूप में ग्राहक ढूंढता था। गिरफ्तार महिला आरोपी प्रीति शर्मा और उसका साथी आकिल बच्चों के रेट तय करने और उन्हें अनाथ बताकर बेचने के मुख्य सूत्रधार थे। गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश के अमरोहा और मुजफ्फरनगर (भोपा) के दो शादीशुदा जोड़े भी शामिल हैं। फिलहाल पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सभी छह आरोपियों को कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर ली है। बरामद किए गए दूसरे बच्चे के संबंध में दिल्ली पुलिस को सूचित कर दिया गया है। एसएसपी के अनुसार, गिरोह में कुछ अन्य नेटवर्क और आरोपियों के शामिल होने की पूरी संभावना है, जिसके लिए जांच जारी रहेगी।