मोतियाबिंद मिलने पर राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत होगा निःशुल्क ऑपरेशन,
रुद्रप्रयाग। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले जनपद रुद्रप्रयाग के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब नेत्र जांच के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान ने जनपद में घर-घर नेत्र परीक्षण एवं स्कूल आई स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू कर दिया है। अभियान के तहत संस्थान की प्रशिक्षित टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की आंखों की जांच करेगी। जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि होने पर मरीजों का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत निर्धारित मद से निःशुल्क ऑपरेशन कराया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पारुल गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जनपद में मोतियाबिंद कैंप के आयोजन के लिए निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान के साथ अनुबंध किया गया है। संस्थान द्वारा अपने प्रोजेक्ट विजन केयर के तहत आगामी 31 मार्च 2027 तक जनपद में घर-घर नेत्र परीक्षण तथा विद्यालयों में आई स्क्रीनिंग कार्यक्रम संचालित करने की अनुमति मांगी गई थी। योग्य दृष्टिमितिज्ञ एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा चिकित्सकीय मानकों और शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की शर्त पर संस्थान को कार्यक्रम संचालन की अनुमति दी गई है।
अभियान के तहत संस्थान की टीम गांव-गांव पहुंचकर निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित करेगी। जांच में नेत्र दोष पाए जाने पर मरीज की आवश्यकता के अनुरूप संस्थान द्वारा अपने व्यय से निःशुल्क चश्मे वितरित किए जाएंगे। वहीं, मोतियाबिंद के मरीज चिन्हित होने पर उनका राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निःशुल्क ऑपरेशन कराया जाएगा। विद्यालयों में भी विद्यार्थियों की दृष्टि संबंधी समस्याओं की स्क्रीनिंग कर समय रहते उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत सोमवार को जखोली ब्लॉक के ग्राम त्यूंखर में नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 55 ग्रामीणों की आंखों की जांच की गई, जिसमें 10 ग्रामीणों में मोतियाबिंद की समस्या पाई गई। इसके अलावा 19 ग्रामीणों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। शिविर में दृष्टिमितिज्ञ कुलेंद्र रावत, गौरव नौटियाल, अमन सरियाल, आकाश राणा और सुखवीर सिंह सहित टीम के सदस्यों ने सेवाएं दीं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अभियान से जनपद के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की नेत्र संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से बुजुर्गों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को अभियान का सीधा लाभ मिलेगा।