Mar 07, 2026

नेपाली मूल के मतदान अधिकारों पर चल रही अटकलों पर चुनाव आयोग की स्पष्टता

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देहरादून। उत्तराखंड में निवास कर रहे नेपाली मूल के लोगों को लेकर चल रही अटकलों पर चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग के अनुसार, राज्य में रह रहे नेपाल मूल के वही लोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल हो सकेंगे, जिनके पास भारतीय नागरिकता होगी। इसके लिए उन्हें नागरिकता का प्रमाण और जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। बिना भारतीय नागरिकता के किसी भी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। 

उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों चंपावत, पिथौरागढ़ से लेकर राजधानी देहरादून तक नेपाल और उत्तराखंड के बीच रोटी-बेटी का गहरा सामाजिक संबंध रहा है। बड़ी संख्या में नेपाली मूल की महिलाएं विवाह के बाद उत्तराखंड में बस गई हैं। वहीं, कई परिवार ऐसे भी हैं जो वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके बच्चों का जन्म भी उत्तराखंड में ही हुआ है। ऐसे में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इन लोगों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे थे। इस संबंध में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि भारत में किसी भी बाहरी देश से आए व्यक्ति के लिए मतदाता बनने की पहली शर्त भारतीय नागरिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग वर्तमान मतदाता सूची में शामिल हैं, उनका नाम भी नागरिकता के आधार पर ही दर्ज हुआ होगा। जिनके पास भारतीय नागरिकता नहीं है, उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। डॉ. जोगदंडे ने बताया कि नेपाली मूल के वे लोग जो अब भारतीय नागरिक बन चुके हैं, लेकिन वर्ष 2003 में मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नागरिकता प्रमाणपत्र और जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की मैपिंग संभव नहीं हो पाएगी, लेकिन एसआईआर के इन्युमरेशन फॉर्म के साथ ये प्रमाण अनिवार्य रूप से जमा कराने होंगे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम शामिल करने का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी नेपाली मूल के भारतीय मतदाता को एसआईआर के ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद नोटिस जारी किया जाता है, तो उन्हें भी नागरिकता और जन्मतिथि का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। निर्वाचन आयोग की यह व्यवस्था मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।