ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। चोपता क्षेत्र में इन दिनों भगवती चण्डिका की दिवारा यात्रा आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। लगभग 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित यह दिव्य यात्रा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का भ्रमण करते हुए भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर रही है। यात्रा के गांव-गांव पहुंचने पर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और जगह-जगह पूजा-अर्चना व भजन-कीर्तन के साथ देवी का भव्य स्वागत किया जा रहा है।
दिवारा यात्रा के दौरान भगवती चण्डिका डोली के रूप में विराजमान होकर प्रत्येक गांव में पहुंचकर ग्रामीणों की कुशलक्षेम पूछ रही हैं। ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में देवी की अगवानी कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। यात्रा के चलते पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना हुआ है तथा लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार यह दिवारा यात्रा आगामी 27 अप्रैल तक जाखणी, मलाऊं व फलासी क्षेत्र के विभिन्न गांवों का भ्रमण करती रहेगी। इस दौरान देवी भक्तों को आशीर्वाद देने के साथ-साथ क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि का संदेश भी दे रही हैं। यात्रा में स्थानीय युवाओं, महिला मंगल दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।
दूसरी ओर भगवती चण्डिका की तपस्थली फलासी गांव में आगामी 30 अप्रैल से आयोजित होने वाले नौ दिवसीय महा बन्याथ (महायज्ञ) की तैयारियां भी जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। आयोजन समिति द्वारा यज्ञ स्थल की साफ-सफाई, व्यवस्थाओं के निर्माण तथा श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की समुचित व्यवस्था की जा रही है। तुगेश्वर मन्दिर समिति अध्यक्ष मानवेन्द्र बर्त्वाल ने बताया कि महा बन्याथ के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, हवन-यज्ञ, कथा-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु भाग लेंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त बनाएगा। सचिव पूर्ण सिंह खत्री का मानना है कि भगवती चण्डिका की दिवारा यात्रा और महा बन्याथ जैसे आयोजन क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और समाज में एकता, सहयोग तथा धार्मिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करते हैं। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक आयोजनों में सहभागिता करें तथा व्यवस्थाओं को बनाए रखने में सहयोग दें।