484 हॉकरों का हुआ पंजीकरण, बिना लाइसेंस संचालन करने वालों पर चालानी कार्रवाई, लाइसेंस भी किए जा रहे जब्त,
रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने घोड़ा-खच्चर संचालन व्यवस्था पर सख्ती बढ़ा दी है। यात्रा मार्ग पर बिना पंजीकरण अथवा बिना लाइसेंस घोड़ा-खच्चर संचालन करने वालों के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों और हॉकरों के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग, आर्थिक दंड तथा अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने सभी घोड़ा-खच्चर स्वामियों एवं संचालकों से अपील की है कि वे अपने अधीन कार्यरत प्रत्येक हॉकर का जिला पंचायत रुद्रप्रयाग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं। बिना पंजीकरण के किसी भी व्यक्ति को केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों का संचालन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
श्री केदारनाथ यात्रा व्यवस्था–2026 के अंतर्गत अब तक 484 हॉकरों का पंजीकरण किया जा चुका है। पंजीकरण प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिला पंचायत रुद्रप्रयाग द्वारा गौरीकुंड, भीमबली, लिनचोली और केदारनाथ में विशेष पंजीकरण शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां पात्र व्यक्तियों का लगातार पंजीकरण किया जा रहा है।
इसके साथ ही जिला पंचायत की टीमों द्वारा यात्रा मार्ग पर नियमित निरीक्षण एवं सत्यापन अभियान भी चलाया जा रहा है। जांच के दौरान जिन घोड़ा-खच्चर स्वामियों द्वारा बिना जिला पंचायत लाइसेंस के हॉकरों की तैनाती की जा रही है, उनके विरुद्ध चालानी कार्रवाई की जा रही है। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के लाइसेंस भी जब्त किए जा रहे हैं। वहीं पात्र व्यक्तियों को प्रतिदिन नियमानुसार नए हॉकर लाइसेंस भी जारी किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने दोहराया है कि यदि कोई घोड़ा-खच्चर संचालक अथवा हॉकर बिना पंजीकरण या बिना वैध लाइसेंस के संचालन करता हुआ पाया गया तो उसके विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग, आर्थिक दंड एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित संचालक और घोड़ा-खच्चर स्वामी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
जिला प्रशासन ने सभी घोड़ा-खच्चर संचालकों, स्वामियों एवं हॉकरों से नियमों का पूर्ण पालन करने तथा प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि केदारनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और सम्मानजनक सेवाएं उपलब्ध कराना तथा यात्रा की गरिमा और व्यवस्था को बनाए रखना है।