चाइल्ड हेल्पलाइन और प्रशासन की काउंसलिंग के बाद शांत हुआ मामला, सुरक्षित घर भेजी गई युवती,
रूद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में सामने आए एक अनोखे प्रेम प्रसंग ने प्रशासन, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों को हैरानी में डाल दिया। यहां एक 20 वर्षीय बालिग युवती अपने 19 वर्षीय नाबालिग प्रेमी के घर पहुंच गई और उससे शादी करने की जिद पर अड़ गई। मामला बढ़ता देख लड़के के परिवार वालों के हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को सूचना दी।
जानकारी के अनुसार, टिहरी गढ़वाल निवासी युवती घर छोड़कर सीधे अपने प्रेमी के घर पहुंची थी। युवती ने साफ तौर पर कह दिया कि वह अब वापस नहीं जाएगी और अपने प्रेमी से ही विवाह करेगी। लेकिन लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने के कारण परिवार वालों को कानूनी कार्रवाई का डर सताने लगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के नेतृत्व में जिले में बाल विवाह रोकने को लेकर चलाए जा रहे अभियान के बीच इस घटना को गंभीरता से लिया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र के निर्देश पर संयुक्त काउंसलिंग टीम गठित की गई, जिसमें वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्य शामिल रहे।
काउंसलिंग के दौरान युवती को समझाया गया कि उसका यह कदम नाबालिग लड़के के भविष्य और परिवार दोनों के लिए कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है। वहीं लड़के को भी बताया गया कि 21 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले विवाह करना कानूनन मान्य नहीं है और ऐसी स्थिति में परिवार भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
बाद में युवती के परिजनों से दूरभाष पर संपर्क किया गया। परिजनों ने आश्वासन दिया कि घर लौटने पर युवती के साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। दोनों परिवारों के बीच सहमति बनने के बाद युवती को सुरक्षित उसके घर भेज दिया गया।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला,
रूद्रप्रयाग। गौरतलब है कि पिछले वर्ष बसुकेदार क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जब एक नाबालिग युवक अपनी बालिग प्रेमिका के घर पहुंच गया था और शादी की तैयारी शुरू हो गई थी। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से उस समय भी विवाह रुकवाया गया था।
बदलते सामाजिक हालात पर उठे सवाल,
रूद्रप्रयाग। समाजशास्त्रियों का मानना है कि परिवारों के साथ संवाद की कमी, सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और युवाओं में भावनात्मक फैसलों की बढ़ती प्रवृत्ति ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है। पहाड़ों में भी अब सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की पारंपरिक तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है।