उत्तराखंड की शांत वादियों में इन दिनों राजनीतिक पारा अचानक चरम पर पहुँच गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने मोर्चा खोल दिया है। राज्य में एक झटके में 13 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के बाद अब पारदर्शिता, निष्पक्षता और नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से सूची से हटाए गए 13 लाख से अधिक मतदाताओं का विधानसभा-वार पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को पूरी प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए। राजीव भवन में मीडिया से बातचीत में धस्माना ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम की ओर से घोषित अंतिम मतदाता सूची पर असंतोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इनमें से अधिकतर नामों को हटाने की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जरूरी है। कांग्रेस का कहना है कि हटाए गए मतदाताओं की विधानसभा-वार सूची सार्वजनिक होने से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन कारणों से कितने नाम सूची से बाहर किए गए। धस्माना ने फॉर्म-6 और फॉर्म-7 से संबंधित प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, इस संबंध में सामने आई आपत्तियों के बाद निर्वाचन आयोग के रुख में बदलाव दिखाई दिया है। कांग्रेस ने मांग की है कि यदि कोई पात्र मतदाता प्रक्रिया के दौरान सूची से बाहर हुआ है तो उसके नाम को तत्काल वापस जोड़ा जाए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिकों के मताधिकार से सीधे जुड़ा विषय है। इसी मुद्दे को लेकर इंडिया गठबंधन ने भी उत्तराखंड में व्यापक आंदोलन की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में हुई बैठक में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं पर चर्चा की गई। गठबंधन नेताओं ने मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। बैठक में नेताओं ने कहा कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से बाहर होता है तो इससे उसके मताधिकार पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने एसआईआर से प्रभावित नागरिकों की शिकायतों को सामने लाने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे को बूथ स्तर तक ले जाएंगे। बैठक में ‘मतदाता बचाओ-लोकतंत्र बचाओ’ अभियान को बूथ स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एसआईआर से प्रभावित प्रत्येक नागरिक की आवाज उठाई जाएगी और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवालों को जनता के बीच ले जाया जाएगा। अब इस पूरे विवाद का केंद्र निर्वाचन आयोग से मांगा गया वह विधानसभा-वार ब्योरा है, जिससे हटाए गए नामों की संख्या और उनके कारणों को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची के बाद शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।

