लोकधुनों पर व्यायाम, संस्कृति से जुड़ रहे नौनिहाल, पीटी और व्यायाम में उत्तराखंड के लोकगीतों का समावेश,

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बच्चों में स्वास्थ्य के साथ अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का विकास,

गुप्तकाशी/रुद्रप्रयाग। राप्रावि देवर के शिक्षक कांता भट्ट और प्रमोद सिंह गजवाण ने विद्यार्थियों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ उन्हें उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति से जोड़ने की अनूठी पहल शुरू की है। विद्यालय में होने वाले व्यायाम और पीटी अभ्यास को स्थानीय लोकगीतों एवं पारंपरिक लोकधुनों से जोड़ा गया है। लोकधुनों की ताल पर बच्चे उत्साह और उमंग के साथ व्यायाम करते नजर आते हैं।

विधायक प्रतिनिधि भगत कोटवाल ने बताया कि लोकगीतों की मधुर धुनों के बीच विद्यार्थी विभिन्न शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। इससे बच्चों में शारीरिक तंदुरुस्ती के साथ अनुशासन, एकाग्रता और टीम भावना विकसित हो रही है। वहीं लोकगीतों और लोकभाषा के माध्यम से बच्चों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि भी बढ़ रही है।

शिक्षकों के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यालय बच्चों को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी सोच के साथ आधुनिक शिक्षा पद्धति में स्थानीय लोकसंस्कृति को शामिल किया जा रहा है, ताकि बच्चे स्वस्थ रहने के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को भी समझ सकें।

विद्यालय की यह पहल बच्चों के शारीरिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को एक साथ जोड़ने का संदेश दे रही है। लोकगीतों की धुन पर होने वाला व्यायाम विद्यार्थियों के लिए सीखने के साथ-साथ आनंद और अपनी संस्कृति से जुड़ने का माध्यम भी बन रहा है।