May 24, 2026

युवा नेता मोहित डिमरी की मुहिम रंग लाई, पीड़ित राहुल के परिवार को मिली 3 लाख की राहत राशि

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प्रधानमंत्री राहत कोष की सहायता और पत्नी को रोजगार मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष” — मोहित डिमरी,

रुद्रप्रयाग। टिहरी जनपद के कोटी-चंबा मोटरमार्ग पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले रुद्रप्रयाग जनपद के लड़ियासू गांव निवासी राहुल के परिवार को आखिरकार प्रशासनिक राहत मिल गई है। लगातार उठती जनभावनाओं और युवा नेता मोहित डिमरी की मुखर पहल के बाद शनिवार को प्रशासन हरकत में आया और तहसील प्रशासन की टीम स्वयं गांव पहुंचकर मुख्यमंत्री राहत कोष से स्वीकृत 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि का चेक राहुल की पत्नी को सौंप गई।

यह मदद ऐसे समय में पहुंची है जब राहुल के निधन के बाद पूरा परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा था। राहुल परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, जो होटल में नौकरी कर अपने बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी, छह माह के मासूम बच्चे और छोटे भाई-बहनों का पालन-पोषण कर रहा था। परिवार की स्थिति उस समय और अधिक दयनीय हो गई जब हादसे के बाद अन्य मृतकों के परिजनों को सहायता राशि वितरित कर दी गई, लेकिन राहुल के परिवार को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा।

प्रशासन की इस संवेदनहीनता के खिलाफ रुद्रप्रयाग विधानसभा से पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं युवा नेता मोहित डिमरी खुलकर मैदान में उतरे। उन्होंने लड़ियासू गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार का दुख-दर्द साझा किया और सरकार व प्रशासन से तत्काल राहत देने की मांग उठाई। मोहित डिमरी ने इस मामले को जनहित और न्याय का मुद्दा बनाते हुए लगातार आवाज बुलंद की, जिसके बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ा और आखिरकार सहायता राशि जारी करनी पड़ी।

शनिवार को जब प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और राहत राशि सौंपी गई, तब ग्रामीणों ने भी इसे जनदबाव और युवा नेतृत्व की जीत बताया। सहायता राशि मिलने से परिवार को तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन भविष्य की चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।

इस मौके पर युवा नेता मोहित डिमरी ने कहा कि, “हम मुख्यमंत्री और प्रशासन का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने देर से ही सही, इस पीड़ित परिवार की सुध ली। लेकिन हमारा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। जब तक प्रधानमंत्री राहत कोष से घोषित सहायता राशि परिवार को नहीं मिल जाती और राहुल की पत्नी के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक हम लगातार लड़ाई लड़ते रहेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरा क्षेत्र परिवार के साथ खड़ा है और उनका संगठन भविष्य में भी हर संभव मदद करता रहेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता के साथ जनता की आवाज बनें, तो प्रशासन को भी जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।