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उत्तराखंड के ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार: 3704 करोड़ की लागत से बनेंगी 528 नई सड़कें और 19 पुल

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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड के दुर्गम और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पक्की सड़कों का जाल बिछाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के तहत उत्तराखंड के लिए 528 नई सड़कों और 19 महत्वपूर्ण पुलों का एक वृहद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इन विकास कार्यों पर लगभग 3,704 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी गांवों तक सड़क पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में सरकार ने नई तैयारी तेज कर दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत प्रदेश में 528 नई सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। करीब 2,850 किलोमीटर लंबाई वाली इन सड़कों के निर्माण पर अनुमानित 3,704 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रस्ताव में 19 पुलों का निर्माण भी शामिल है। यदि केंद्र सरकार से मंजूरी मिल जाती है, तो प्रदेश के अनेक ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि प्रस्ताव को अक्टूबर के अंत तक या नवंबर के पहले सप्ताह में मंजूरी मिल सकती है। हालांकि, अभी इन 528 सड़कों को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। इसलिए प्रस्तावित लागत को मंजूर बजट मानना सही नहीं होगा। केंद्र की मंजूरी के बाद ही निविदा प्रक्रिया और निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। उत्तराखंड में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी बुनियादी जरूरत है। पहाड़ी क्षेत्रों में कई गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बुजुर्गों, मरीजों, विद्यार्थियों और किसानों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बनती है। ऐसे में प्रस्तावित सड़कों का निर्माण ग्रामीणों के लिए बाजार, विद्यालय, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में मददगार हो सकता है। सड़क संपर्क बेहतर होने से कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और दूरदराज की बसावटों को मुख्यधारा से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी के मुताबिक, सरकार को उम्मीद है कि केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद अगले एक से दो महीने में निविदा प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव में 19 पुलों का निर्माण भी शामिल किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में बरसाती गदेरों, नालों और जलधाराओं के कारण कई बार आवागमन बाधित हो जाता है। बारिश के मौसम में रास्ते बंद होने से ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे स्थानों पर पुल बनने से सालभर आवाजाही बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि पुल किन स्थानों पर बनाए जाते हैं और निर्माण कार्य निर्धारित समय में कितना पूरा होता है। सड़क और पुलों का समन्वित निर्माण ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। नई 528 सड़कों के प्रस्ताव के साथ-साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में पहले से स्वीकृत परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ रहा है। ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी के अनुसार, प्रदेश के लिए 1,492 सड़कों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 184 सड़कों की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि लगभग 120 सड़कों पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। मंत्री के मुताबिक, शेष स्वीकृत सड़कों पर भी अगले एक सप्ताह से लेकर अधिकतम एक महीने के भीतर काम शुरू करने की तैयारी है। इस प्रकार प्रदेश में पहले से स्वीकृत सड़कों के निर्माण के साथ नई परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने की कोशिश भी जारी है। पहले से स्वीकृत सड़कों और प्रस्तावित 528 नई सड़कों को मिलाकर प्रदेश में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के सड़क निर्माण कार्यों की योजना सामने आई है। हालांकि, नई परियोजनाओं के लिए केंद्र की मंजूरी अभी बाकी है और प्रस्तावित लागत अंतिम स्वीकृत राशि से अलग हो सकती है। सरकार ने अगले दो से तीन वर्षों में ऐसी ग्रामीण बसावटों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है, जो अभी इस सुविधा से वंचित हैं। अब सबसे अहम सवाल यह है कि केंद्र से मंजूरी कब मिलती है और इसके बाद निविदा से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है। यदि योजनाएं समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतरती हैं, तो ग्रामीण कनेक्टिविटी में सुधार के साथ उत्तराखंड के दूरदराज के गांवों तक विकास की पहुंच मजबूत हो सकती है।