Aug 12, 2026

उत्तराखंड में मदरसों के नए नियमन पर संकट: एक महीने में मात्र 1% को मिली मान्यता, 30 सितंबर के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी

post-img

देहरादून। राज्य के अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा से जोड़ने और पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के उत्तराखंड सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान को शुरुआती झटका लगा है। 1 जुलाई को मदरसा बोर्ड को समाप्त कर गठित किए गए 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' के एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। राज्यभर के कुल 452 मदरसों में से अब तक मात्र 7 मदरसों (लगभग 1 प्रतिशत) ने ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से आधिकारिक मान्यता ली है।

उत्तराखंड में मदरसों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनमें आधुनिक शिक्षा व्यवस्था लागू करने की सरकार की कोशिश को शुरुआती दौर में ही बड़ा झटका लगा है। एक जुलाई को मदरसा बोर्ड समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद प्रदेश के 452 मदरसों में केवल सात को ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता मिल पाई है। यानी अब तक महज करीब एक फीसदी मदरसे ही नई व्यवस्था के दायरे में आए हैं। देहरादून के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मदरसों ने जांच टीम को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया, जबकि कुछ संस्थानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता नहीं लेंगे। कई मदरसे अभी मान्यता के लिए जरूरी पत्रावली तैयार करने की बात कह रहे हैं। सरकार की नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ विज्ञान, गणित और अन्य आधुनिक विषयों से जोड़ना है। इसके साथ ही अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को एक समान प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में लाकर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की योजना है। प्राधिकरण के दायरे में मुस्लिम के अलावा सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदाय के शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं।

मदरसा बोर्ड से पहले मान्यता प्राप्त 41 मदरसों में भी अधिकांश संस्थान अब तक नए मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं। ऊधमसिंह नगर में 11 मदरसों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन निर्धारित मानक पूरे नहीं होने के कारण सभी 11 आवेदन निरस्त कर दिए गए। वहीं हरिद्वार में 18 में से सात मदरसों को मान्यता मिल चुकी है। देहरादून और नैनीताल में अभी इस संबंध में बैठक नहीं हो सकी है। प्राधिकरण ने मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता लेने के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह समयसीमा 30 सितंबर को पूरी होगी। इसके बाद मानक पूरे नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, संस्थानों के पास अब दो विकल्प हैं नई व्यवस्था के तहत मान्यता हासिल करें या फिर वहां पढ़ रहे बच्चों को दूसरे मान्यता प्राप्त विद्यालयों में स्थानांतरित करें। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिक से अधिक मदरसों को नई शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाए। वहीं, मान्यता से इनकार कर रहे संस्थानों को लेकर 30 सितंबर के बाद क्या कार्रवाई होगी, इस पर भी निगाहें टिकी हैं।