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सड़क के अभाव में 85 वर्षीय बुजुर्ग की जिंदगी दांव पर! डंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाने का वीडियो वायरल,

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मुरचौंडा पालीगाड़ में दो किलोमीटर सड़क के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे ग्रामीण, श्रमदान भी नहीं बदल सका तस्वीर,

 

बीमार बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को करनी पड़ी भारी मशक्कत

डीएम बोले- वन विभाग से जुड़ी अड़चनें दूर करने की चल रही कार्रवाई,

 

 

रोहित डिमरी। संपादक,

 

रुद्रप्रयाग। पहाड़ में विकास के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की हकीकत को झकझोरने के लिए काफी है।

कहीं सड़क पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं बन रही हैं, तो कहीं महज दो किलोमीटर सड़क के इंतजार में ग्रामीणों की पीढ़ियां गुजर रही हैं।

 

भरदार पट्टी के मुरचौंडा पालीगाड़ में सड़क न होने का दर्द अब एक वायरल वीडियो के रूप में सामने आया है। वीडियो में 85 वर्षीय बुजुर्ग को डंडी के सहारे दुर्गम रास्ते से अस्पताल पहुंचाने के लिए ले जाते ग्रामीण दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य ग्रामीणों की बेबसी और सड़क की जरूरत को बयां कर रहा है।

 

मामला ग्राम पंचायत चौंडा सिराई के मुरचौंडा पालीगाड़ का है। गांव निवासी 85 वर्षीय फतेराम सेमवाल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाने की नौबत आई, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। आखिरकार ग्रामीणों ने डंडी का सहारा लिया और बुजुर्ग को दुर्गम रास्ते से पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया। जिस उम्र में बुजुर्ग को आराम और बेहतर चिकित्सा सुविधा की जरूरत है, उस उम्र में उन्हें इस तरह अस्पताल तक पहुंचाने की मजबूरी ने क्षेत्र की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है।

 

दो किलोमीटर सड़क के लिए वर्षों से संघर्ष

ग्रामीणों के अनुसार मुरचौंडा पालीगाड़ तक करीब दो किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने समस्या उठाई गई, लेकिन धरातल पर सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों से लेकर बीमारी और आपातकालीन परिस्थितियों तक में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। सबसे अधिक मुश्किल बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है।

 

श्रमदान किया, फिर भी नहीं बदली गांव की तस्वीर

सड़क निर्माण की उम्मीद में कुछ दिन पूर्व ग्रामीणों ने स्वयं श्रमदान कर सामूहिक प्रयास भी किया था। ग्रामीणों की इस पहल के बावजूद गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीण जशोधर सेमवाल का कहना है कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से सड़क के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन शासन-प्रशासन और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों को आश्वासनों के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने सड़क निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाकर जल्द गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की।

 

डीएम ने बताया, वन विभाग की अड़चनें दूर करने की कार्रवाई जारी

मामले में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि मुरचौंडा पालीगाड़ सड़क निर्माण को लेकर कार्रवाई चल रही है। वर्तमान में वन विभाग की ओर से सड़क निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर करने की प्रक्रिया की जा रही है।

 

अब सवाल यह है कि आखिर कब मिलेगी सड़क? क्या मुरचौंडा पालीगाड़ के ग्रामीणों को सड़क सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा? क्या हर आपात स्थिति में मरीजों को इसी तरह डंडी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना उनकी मजबूरी बनी रहेगी? 85 वर्षीय बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने का वायरल वीडियो जिम्मेदारों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, धरातल पर सड़क निर्माण का काम शुरू होने का इंतजार है।